Thursday, January 31, 2013

आस्था थोपी नहीं जाती ---
विश्व सभ्यता की एक अद्भुत सी उपज ,
जो दिखाई नहीं देती ,मगर हर कोई दिल से महसूस करता है .
सभ्यताए बहुत सी आई ,आकर चली गयी ,अभी आगे और भी  आएँगी .
हर किसी ने इसे अपने ढ़ंग से परिभाषित करना चाहा  ,
लेकिन लोग अगर कुछ समझ पाए तो बस आस्था .
आस्था को किसी ने  प्रेरित नहीं किया ,
लोगो के अन्दर खुद अपनी मर्जी से आई .और आई तो ऐसी  ,
मानव मस्तिष्क से कभी गई ही नहीं .
आदिमानव नंगे रहते थे ,कोई भाषा नहीं थी ,कोई नियम नहीं था .
किसी एक ने खुद को ढाला  देखकर सब लोग ढल गए .
उसने ये नहीं कहा मेरी तरह तुम भी करो ,और एक सभ्यता बन गयी .
क्योकि उसमे कुछ बात थी लोगो ने कुछ बेहतर महसूस किया .
धर्म भी कुछ ऐसा ही है ,हमें जो पसंद हो हम खुद पर लागू कर सकते है ,
लेकिन हम ये दबाव नही बना सकते की तुम भी यही करो .
अगर धर्म बेहतर है तो अपने आप फिजाओं  में बिखर जाएगा .
उसे बिखेरने की जरुरत नहीं पड़ेगी .  इतिहास गवाह है ,
जो धर्म खुद फैला उसकी हस्ती कभी मिटी ही नहीं ,
जिसे फैलाया गया उसमे कोई न कोई कशिश रह गयी .
मेरा मानना है धर्म का प्रचार न करे बल्कि खुद को उसमे ढाले ,
धर्म अपने आप फ़ैल जाएगा बिना किसी विरोध के ,
क्योकि हर धर्म का मूल एक ही है इंसानियत और एहसास .
किसी के भावनाओं को बिन कहे महसूस कर पाना ही धर्म है।
यही आस्था है इसे थोपा\नहीं जा सकता .



Wednesday, January 30, 2013

 एक परिभाषा प्रेम की -
मोहब्बत एक ऐसा शब्द है ,जो एक अजनबी को अपना बना दे .
मोहब्बत एक एहसास है ,जो पल भर में अपने को बेगाना बना दे .
हम नहीं जानते हमने जिन्दगी में मोहब्बत की या नहीं .
हम नहीं जानते किसी को हमसे मोहब्बत है या नहीं .
लेकिन हमसे कोई ये सवाल करे की मोहब्बत का हो जाना सही है या गलत .
तो मेरा जवाब होगा-------
न तो मोहब्बत की शुरुआत  गलत है,
न तो मोहब्बत का आगाज गलत है।
गलत है तो बस ,
मोहब्बत में कामयाब होने पर  दुनिया  भुला  देना .
और नाकाम होने पर ,खुद को भुला देना .
मोहब्बत एक ऐसी मिसात है ,
जिसकी कामयाबी इंसान  बना दे .
और मोहब्बत की नाकामी इंसान को भगवान्  बना दे .
इंसान बनना भी एक अदा है ,भगवान्  बनना  भी एक अदा है .
मोहब्बत जिसे इंसान बनाए ,
वो मोहब्बत की रौशनी से दिवाली  मनाता  है .
मोहब्बत जिसे भगवान् बनाए ,
वो खुद को जलाकर औरों के घर रोशन  करता है।