Tuesday, March 5, 2013

दिल से ..

इन हाथों में हर वक्त चुभे कांटे फूलों की जगह ,
हमने जजबात निभाएं है उसूलों की जगह .
उसूलों पे चलते है  ,ये जीवन की जरूरतें है ,
जजबात निभाते है ,ये मानवपन की आदतें है .
बहुत हसीं है दिन ,रात खुबसूरत है .
तेरे शहर की हर बात खुबसूरत है .
अँधेरी रात हो या चांदनी का मंजर हो .
हर एक सफ़र में तेरा साथ खुबसूरत है .
फिजा में मस्ती है तारों में रोशनी है अभी .
अभी न जाओ अभी रात खुबसूरत है .
नसीब रोज का मिलना  बुरा नहीं लेकिन .
कभी कभी की मुलाक़ात खुबसूरत है .

Monday, March 4, 2013

कोई तो है ..

हर तरफ हर जगह हर कहीं पे है,
 हाँ उसी का नूर .
रोशनी का कोई दरिया तो है,
 हाँ कहीं पे जरुर .
ये आसमान ये जमीं, चाँद और सूरज ,
क्या बना सका है कभी कोई भी कुदरत .
कोई तो है जिसके आगे है आदमी मजबूर .
इंसान जब कोई है राह से भटका ,
 किसने दिखा दिया उसको सही रास्ता .
कोई तो है जो करता है मुश्किल हमारी दूर .


मेरा गम और मेरी ....

मेरा गम और मेरी  हर ख़ुशी तुमसे है ,
जानेमन ये मेरी जिंदगी तुमसे है .
यै  मेरी जानेजां ये मेरी मेहरबान
 तुमसे रंगीन है ये जमीं आसमान 
तुमसे आबाद है मेरे दिल का जहां 
तुम मेरा चाँद हो तुम मेरी रौशनी .
तू निशानी मोहब्बत के मंजिल की है ,
तेरे दम से हसीं अंजुमन दिल की है ,
फैसला है यही बात है ये अटल 
हुस्नवालों में तेरा नहीं है बदल .
गीत का हुस्न हो,हुस्न का हो गजल 
शायरों की हसीं शायरी तुमसे है .
मेरा गम और मेरी हर ...

बदल गया है कोई दोस्त ...

बदल गया है कोई यार आसमान की तरह ,
में सदमे इश्क में सहता हूँ बेजुबान की तरह .
ग़मों को लेके जमाने की आंधियां आई ,
उजड़ गया है मेरा दिल भी गुलिस्तान की तरह .
किनारे लाके डुबोई है उसने ही कश्ती ,
वो एक यार जो मिलता  था मेहरबान की तरह .
मरीज हम भी किसी के वो सच्चे आशिक है ,
रहेंगे मर के जमाने में दास्ताँ की तरह .

jagjit singh

कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा ,
मेरा दरवाजा हवाओं ने हिलाया होगा .
दिले नादाँ न धड़क ये दिले नादाँ न धड़क ,
कोई ख़त लेके पड़ोसी के घर आया होगा .
गुल से लिपटी हुयी तितली को गीराकर देखो ,
आंधियां तुमने दरख्तों को गिराया होगा .
कैफ परदेश में मत याद करो अपना मकान ,
अबके बारिश ने उसे तोड़ गिराया होगा .

Sunday, March 3, 2013

चित्रा  सिंह की एक खुबसूरत गजल ...
सफ़र में धुप तो होगी ,जो चल सको तो चलो .
सभी है भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो .
किसी के वास्ते राहे कहाँ बदलती है ,
तुम अपने आप को खुद ही बदल सको तो चलो .
यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता ,
मुझे गिरा के अगर तुम संभल सको तो चलो . है 
यही है जिंदगी कुछ ख्वाब चंद उम्मीदे 
इन्ही खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो .